Girvi Rakhe Sone (Gold) Ka Byaj Kaise Jodein? (सही हिसाब करने का तरीका)

Last Updated: February 13, 2026 | ✍️ By: Dinesh Kumar
Girvi Rakhe Sone Ka Byaj Kaise Nikale - Gold Loan Interest Formula

सोना गिरवी रखा है और अब ब्याज का हिसाब समझ नहीं आ रहा? — यह दिक्कत बहुत आम है। ज़्यादातर लोग जो सोना गिरवी रखते हैं, उन्हें पता ही नहीं होता कि ब्याज कैसे जुड़ता है। बस जो बोल दिया, वो भर दिया।

📌 इस पोस्ट में क्या है? — सोने पर लोन का ब्याज कैसे निकालें, LTV Ratio क्या है, बैंक और Muthoot में फ़र्क, छिपे हुए शुल्क, और सोना छुड़ाने के नियम। सब कुछ सीधी भाषा में।

📋 Quick Answer (सीधा जवाब)

Gold Loan का ब्याज कैसे निकालें?

Formula: ब्याज = (लोन राशि × ब्याज दर × महीने) ÷ (12 × 100)

उदाहरण: ₹1,00,000 का लोन, 12% सालाना, 6 महीने = ₹6,000 ब्याज

LTV Ratio: ₹2.5L तक = 85% | ₹2.5-5L = 80% | ₹5L+ = 75% (RBI Rule)

सबसे सस्ता: SBI/PNB (8-10% p.a.) | महंगा: Muthoot (10-22%) | सबसे महंगा: साहूकार (24-36%)


सोने पर कितना लोन मिलता है? (75% वाला नियम — LTV Ratio)

सबसे पहले ये समझ लें कि आपको सोने की पूरी कीमत का लोन कभी नहीं मिलेगा। RBI (Reserve Bank of India) का एक सख्त नियम है जिसे LTV Ratio (Loan-to-Value Ratio) कहते हैं।

सीधी भाषा में — अगर आपका सोना ₹1,00,000 का है, तो बैंक पूरे ₹1 लाख नहीं देगा। RBI ने तय किया है:

लोन राशि LTV Ratio (कितना % मिलेगा) उदाहरण (₹1 लाख के सोने पर)
₹2.5 लाख तक 85% ₹85,000 तक लोन
₹2.5 लाख से ₹5 लाख 80% ₹80,000 तक लोन
₹5 लाख से ऊपर 75% ₹75,000 तक लोन

📝 ध्यान रखें: ये नियम RBI ने बनाया है, इसलिए ये सभी बैंकों और फाइनेंस कंपनियों पर लागू होता है। कोई भी — चाहे SBI हो, Muthoot हो, या गाँव का साहूकार — इससे ज़्यादा लोन नहीं दे सकता (कानूनी तौर पर)।

⚠️ साहूकार/सुनार की बात अलग है: गाँव-कस्बों में सुनार या साहूकार LTV की परवाह नहीं करते। वो 50-60% ही देते हैं, लेकिन ब्याज 2-3% महीना (2-3 रुपये सैकड़ा) लगाते हैं (यानी 24-36% सालाना!)। इसलिए हमेशा बैंक या रजिस्टर्ड कंपनी को प्राथमिकता दें।

ब्याज कैसे निकालें? (Gold Loan Interest Formula)

अब आता है असली सवाल — "मेरा कितना ब्याज लगेगा?"। इसका फॉर्मूला बहुत सीधा है:

📐 ब्याज (Interest) = (लोन राशि × ब्याज दर × महीने) ÷ (12 × 100)

यहाँ ब्याज दर = सालाना (Annual) % में

उदाहरण (Example):

मान लें आपने ₹1,00,000 का Gold Loan लिया, ब्याज दर है 12% सालाना, और आपको 6 महीने बाद छुड़ाना है।

Step 1: सालाना ब्याज = ₹1,00,000 × 12 ÷ 100 = ₹12,000

Step 2: 1 महीने का ब्याज = ₹12,000 ÷ 12 = ₹1,000

Step 3: 6 महीने का ब्याज = ₹1,000 × 6 = ₹6,000

✅ कुल चुकाना होगा: ₹1,00,000 (मूलधन) + ₹6,000 (ब्याज) = ₹1,06,000

बस! यही फॉर्मूला है। अगर आपको ब्याज निकालने का तरीका विस्तार से समझना है, तो हमारी वो पोस्ट भी पढ़ लें।

प्रैक्टिकल टिप:

ज़्यादातर Finance कंपनियाँ (Muthoot, Manappuram) ब्याज रोज़ाना (Daily) के हिसाब से जोड़ती हैं, महीने के नहीं। इसलिए अगर आप 6 महीने 10 दिन बाद छुड़ाएं, तो वो 10 दिनों का भी ब्याज अलग से लगेगा।

Daily Interest Formula:

= (₹1,00,000 × 12%) ÷ 365 = ₹32.87 प्रतिदिन

190 दिन (6 महीने 10 दिन) का ब्याज = ₹32.87 × 190 = ₹6,245


Bank vs Finance Company — कहाँ सही है? (Honest Comparison)

लोग अक्सर पूछते हैं — "Muthoot में दूँ या SBI में?"। दोनों के अपने फायदे-नुकसान हैं। मैं यहाँ बिना किसी का पक्ष लिए सीधी बात बताता हूँ:

पैरामीटर सरकारी बैंक (SBI/PNB) Finance Company (Muthoot/Manappuram) सुनार / साहूकार
ब्याज दर 8% - 10% सालाना 10% - 22% सालाना 24% - 36% सालाना (2-3% महीना)
लोन मिलने का समय 2-3 दिन (Processing slow) 30 मिनट - 1 घंटा तुरंत
Documents Aadhaar, PAN, Photo, Signature सिर्फ Aadhaar + Photo कुछ नहीं
सोने की सुरक्षा ✅ बैंक लॉकर (सबसे सुरक्षित) ✅ Insurance + Vault ❌ कोई गारंटी नहीं
Hidden Charges कम (0.5% Processing Fee) ज़्यादा (Custody, SMS, Auction) सब कुछ Hidden
कब सही है? लंबे समय के लिए (3-12 महीने) Emergency में (1-3 महीने) ❌ कभी नहीं (बचें)
💡 मेरी सलाह: अगर 2-3 दिन रुक सकते हैं, तो SBI या PNB जाएं — ब्याज आधा बचेगा। Emergency हो तो Muthoot/Manappuram ठीक है, लेकिन जल्दी छुड़ा लें वरना ब्याज मूलधन से ज़्यादा हो जाएगा।

लोन बंद करते समय सावधानी (Hidden Charges जो कोई नहीं बताता)

ये सबसे ज़रूरी सेक्शन है। ज़्यादातर लोग ब्याज तो जानते हैं, लेकिन इन छुपे हुए खर्चों से अनजान रहते हैं:

1. Processing Fee

  • बैंक: लोन राशि का 0.25% - 0.50% (₹1 लाख पर ₹250-500)
  • NBFC (Muthoot/Manappuram): ₹10 - ₹50 (बहुत कम, लेकिन Re-pledge पर अलग चार्ज)

2. Safe Custody Charges (सोना रखने का खर्चा)

  • Muthoot: ₹5 प्रति ग्राम प्रति महीना (50 ग्राम सोने पर ₹250/महीना)
  • बैंक: आमतौर पर कुछ नहीं लगता

3. Penal Interest (देरी का जुर्माना)

  • समय पर ब्याज नहीं भरा? 2-3% Extra लगेगा Penalty के रूप में
  • Manappuram: 2% p.a. Penal Interest + GST

4. Auction Notice Charges

  • अगर आपने बहुत देर कर दी (EMI नहीं भरी), तो कंपनी सोना नीलाम (Auction) कर सकती है
  • Auction से पहले Notice भेजते हैं — उसके भी ₹500 - ₹1,000 charge लगते हैं

5. Foreclosure Charges (समय से पहले बंद करना)

📢 Good News (RBI Rule — January 2026): अब Floating Rate Gold Loans पर कोई Foreclosure Penalty नहीं लगेगी। ये नियम सभी बैंकों और NBFCs पर लागू है। (Source: RBI Circular, January 2026)

सोना गिरवी रखने के लिए क्या चाहिए? (Documents Required)

  • आधार कार्ड (पहचान पत्र के रूप में ज़रूरी)
  • पैन कार्ड (₹50,000 से ऊपर के लोन पर अनिवार्य)
  • पासपोर्ट साइज़ फोटो (2 कॉपी)
  • सोने के गहने (22 कैरेट या ज़्यादा, RBI के अनुसार सिर्फ गहने और 50 ग्राम तक बैंक के सिक्के स्वीकार होते हैं)

⚠️ सोने की ईंट (बिस्किट) पर SBI और ज़्यादातर बैंक लोन नहीं देते। सिर्फ सोने के गहने और बैंक के सिक्के ही चलते हैं।


सोना छुड़ाने के नियम

लोन खत्म हुआ, पैसे भर दिए — अब सोना कब मिलेगा? RBI ने ये भी तय किया है:

  1. 7 कार्य दिवस: लोन बंद होने के बाद बैंक/कंपनी को 7 कार्य दिवसों में सोना वापस करना अनिवार्य है।
  2. गिनकर लें: सोना लेते समय वज़न और हॉलमार्क ज़रूर चेक करें। कई बार पत्थर या हुक का वज़न अलग कर दिया जाता है।
  3. रसीद रखें: जमा रसीद (गिरवी पर्ची) को संभालकर रखें — इसके बिना सोना नहीं मिलेगा। खो गई तो ₹25-₹100 जुर्माना लगता है।

और अगर लोन बंद करने के बाद NOC Application भी ले लें तो भविष्य में कभी कोई दिक्कत नहीं आएगी।


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

नहीं। RBI के नियम के अनुसार सोने की ईंट (बिस्किट), या 24 कैरेट शुद्ध सोने पर बैंक लोन नहीं देते। सिर्फ 22 कैरेट या उससे ज़्यादा शुद्धता वाले गहने और बैंकों द्वारा बेचे गए 50 ग्राम तक के सोने के सिक्के ही स्वीकार होते हैं।

Muthoot और Manappuram दोनों में ब्याज रोज़ाना के हिसाब से जुड़ता है। इसलिए अगर आप 1 दिन भी ज़्यादा रखें, तो उस दिन का ब्याज अलग से जुड़ जाएगा। जितनी जल्दी छुड़ाओगे, उतना कम ब्याज लगेगा।

बिल्कुल नहीं! सुनार/साहूकार 2-3% महीना ब्याज लेते हैं (यानी 24-36% सालाना), जबकि बैंक सिर्फ 8-10% सालाना लेता है। साथ ही सोने की सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं होती। अगर कोई विवाद हो जाए तो कानूनी मदद भी नहीं मिलेगी क्योंकि कोई लिखित करार (एग्रीमेंट) नहीं होता। (लिखित करार कैसे बनाएं, ये यहाँ पढ़ें)।

अगर समय पर किस्त/ब्याज भरते रहें तो नहीं। लेकिन अगर भुगतान नहीं किया या सोना नीलाम हो गया, तो CIBIL स्कोर बुरी तरह गिरेगा। बैंक और फाइनेंस कंपनियाँ दोनों CIBIL को भुगतान की रिपोर्ट भेजते हैं।

अगर लोन की अवधि खत्म होने के बाद भी पैसे नहीं भरे और 2-3 नोटिस (₹30-₹100 प्रति नोटिस) के बाद भी कोई जवाब नहीं दिया, तो बैंक/कंपनी सोना नीलाम कर सकती है। नीलामी से जो पैसा आएगा, उसमें से लोन + ब्याज + शुल्क काटकर बाकी आपको मिल जाएगा। लेकिन ऐसा होने से CIBIL स्कोर बर्बाद हो जाता है। (पढ़ें: लोन न चुकाने पर क्या होता है?)

Dinesh Kumar
Dinesh Kumar

Financial Tool Expert & Founder of ByajCalculator.in

नमस्ते! मैं दिनेश कुमार हूँ। बैंकिंग और ग्रामीण वित्त (Rural Finance) में मुझे 10 वर्षों से अधिक का अनुभव है। मैंने देखा है कि सही जानकारी न होने के कारण लोग अक्सर ब्याज गणना में गलती कर बैठते हैं। इसी समस्या को सुलझाने के लिए मैंने ByajCalculator.in की शुरुआत की है, ताकि किसान भाई और छोटे व्यापारी आसानी से अपनी ब्याज गणना कर सकें।

Connect on LinkedIn
✅ Link Copied! Ab Instagram mein paste karein